MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 6 स्थलमण्डल-स्थल एवं स्थलाकृतियाँ

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 6 स्थलमण्डल-स्थल एवं स्थलाकृतियाँ

MP Board Class 8th Social Science Chapter 6 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –
(1) पृथ्वी का लगभग कितने प्रतिशत भाग जलमण्डल से घिरा हुआ है?
(क) 61 प्रतिशत
(ख) 71 प्रतिशत
(ग) 81 प्रतिशत
(घ) 51 प्रतिशत
उत्तर:
(ख) 71 प्रतिशत   (2) किस देश में सबसे अधिक भूकम्प आते हैं ?
(क) भारत
(ख) फ्रांस
(ग) जापान
(घ) श्रीलंका
उत्तर:
(ग) जापान प्रश्न 2.
रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
(1) पृथ्वी का लगभग ……………… प्रतिशत भाग स्थल द्वारा घिरा हुआ है।
(2) पृथ्वी की सबसे. बाहरी पर्त को भूपर्पटी या ………… कहते हैं।
(3) सियाल में सिलिका तथा ……………….. धातुओं की प्रधानता होती है।
(4) प्रति 32 मीटर गहराई पर ………………. सेल्सियस तापमान बढ़ जाता है।
उत्तर:

  1. 29
  2. बाहरी परत
  3. एल्युमिनियम
  4. 12

MP Board Class 8th Social Science Chapter 6 अति लघु उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 3.
(1)भू-पटल की प्राथमिक शैलें कौन-सी हैं ?
उत्तर:
आग्नेय शैलें भू-पटल की प्राथमिक शैलें हैं।   (2) धरातल की तीन प्रमुख स्थलाकृतियों के नाम लिखिए।
उत्तर:

  • पर्वत
  • पठार
  • मैदान

धरातल की तीन प्रमुख स्थलाकृतियाँ हैं। (3)शैलों में जब लहरनुमा मोड़ पड़ जाते हैं तो उन्हें क्या कहते हैं ?
उत्तर:
शैलों में जब लहरनुमा मोड़ पड़ जाते हैं तो उन्हें ‘वलन’ कहते हैं। (4)संसार में सबसे अधिक ज्वालामुखी कहाँ हैं ?
उत्तर:
संसार में सबसे अधिक ज्वालामुखी प्रशान्त महासागर के चारों ओर तटीय भागों तथा महाद्वीपीय क्षेत्रों में हैं।   MP Board Class 8th Social Science Chapter 6 लघु उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 4.
(1) वलन तथा भ्रंशन में क्या अन्तर है ?
उत्तर:
पृथ्वी के अन्दर क्षैतिज भू-संचलन द्वारा जब शैलों में लहरनुमा मोड़ पड़ जाते हैं तो इन्हें ‘वलन’ कहते हैं जबकि क्षैतिज भू-संचलन से उत्पन्न दबाव तथा तनाव के कारण शैलों के टूटकर अलग होने की प्रक्रिया को ‘भ्रंशन’ कहते हैं। (2) अवसादी शैलों का निर्माण कैसे होता है ?
उत्तर:
जल, वायु एवं हिम द्वारा बहाकर लाये कंकड़, पत्थरों के छोटे-छोटे कण, जीवाश्म आदि (अवसाद) भू-भाग या समुद्र तल में परतों के रूप में जमा हो जाते हैं और ये अवसाद की परतें गर्मी तथा दबाव के कारण कठोर हो जाती हैं। यही कठोर पदार्थ अवसादी शैल कहलाते हैं। (3) ज्वालामुखी किसे कहते हैं ? उद्भेदन के दो कारण दीजिए।
उत्तर:
ज्वालामुखी’ भू-पटल पर एक गोल छेद या दरार वाला खुला भाग होता है। इससे होकर पृथ्वी के अत्यन्त तप्त | भू-गर्भ से गैसें, तरल लावा, ऊष्ण जल, चट्टानों के टुकड़े, राख व धुआँ आदि निकलता है। प्लेटों का खिसकना व भूकम्प ज्वालामुखी उद्भेदन के दो प्रमुख कारण हैं। (4) भूकम्प से लाभ तथा हानियाँ लिखिए।
उत्तर:
भूकम्प से लाभ –

  • इससे कभी-कभी उपजाऊ भूमि उभर आती है।
  • नवीन भू-आकारों का निर्माण होता है।
  • इनसे बहुमूल्य खनिज पदार्थ धरातल पर आ जाते हैं।
  • इनसे नीचे हो जाने वाले भू-भाग पर झीलों का निर्माण होता है। भूकम्प से हानियाँ
  • इससे जन-धन की हानि होती है। मनुष्य, पशु आदि मर जाते हैं। इमारतें गिर जाती हैं। रेलें, सड़कें टूट जाती हैं, कारखाने नष्ट हो जाते हैं।
  • नदियों के मार्ग रुकने से भयंकर बाढ़ आ जाती है। समुद्र में बहुत ऊँची विनाशकारी लहरें उठती हैं।
  • भूखण्डों में दरारें पड़ जाती हैं तथा कुछ भाग नीचे स जाता है।

MP Board Class 8th Social Science Chapter 6 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 5.
(1) शैल किसे कहते हैं ? शैलों के विभिन्न प्रकार बताइए।
उत्तर:
धरातल की रचना करने वाले सभी पदार्थ शैल कहलाते हैं। अर्थात् जिन पदार्थों से भूपृष्ठ का निर्माण हुआ है, उन्हें शैल कहते हैं। शैलों के तीन प्रकार हैं – (1) आग्नेय शैलें – ये शैलें भूपृष्ठ की प्रारम्भिक शैलें हैं। इन्हें प्राथमिक शैलें भी कहते हैं। ये शैलें पृथ्वी के आन्तरिक भाग में पिघले पदार्थों के ठण्डे होने से बनी हैं। भूपृष्ठ के नीचे अति गर्म पिघला पदार्थ भू-पर्पटी में अथवा उसके ऊपर ठण्डा होकर कठोर हो जाता है, उसे आग्नेय शैल कहते हैं। (2) अवसादी शैल – जल, वायु एवं हिम द्वारा बहाकर लाये गये कंकड़, पत्थरों के छोटे-छोटे कण, जीवाश्म आदि भू-भाग या समुद्र तल में परतों के रूप में जमा होते जाते हैं। इस प्रकार जमे हुए पदार्थ को ‘अवसाद’ कहते हैं। यही अवसाद की पर्ते गर्मी तथा दबाव के कारण कठोर हो जाती हैं तो उन्हें अवसादी या परतदार शैल कहा जाता है। (3) कायान्तरित शैलें – जब आग्नेय तथा अवसादी शैलों के रूप, रंग और गुण में आन्तरिक ताप तथा दबाव के कारण पूर्ण रूप से परिवर्तन हो जाता है तो उन्हें कायान्तरित या परिवर्तित शैल कहा जाता है। (2) पृथ्वी की संरचना को रेखाचित्र द्वारा समझाइए।
उत्तर:
पृथ्वी की सबसे बाहरी व ऊपरी पर्त को भू-पर्पटी या स्थलमण्डल कहते हैं। इसी पर प्राणी जगत निवास करता है। यह मण्डल हल्की जलज शैलों से बना हआ है और इसकी मोटाई लगभग 10 से 70 किमी है। स्थलमण्डल की ऊपरी परत को सियाल (Sial) भी कहते हैं। इसमें सिलिका तथा ऐल्युमीनियम –


पृथ्वी की आन्तरिक संरचना दो धातुओं की प्रधानता है। सियाल के नीचे की परत को सीमा (Sima) कहते हैं। इसमें सिलिका और मैग्नीशियम धातुओं की प्रधानता है। इसके नीचे मैंटल है। इसमें ओलिवाइन और पाइरॉक्सिन खनिजों की प्रधानता है। इसके नीचे पृथ्वी का क्रोड है जिसे ‘नीफे’ (Nife) कहते हैं। (3) ज्वालामुखी के मानव जीवन पर होने वाले प्रभाव बताइए।
उत्तर:
ज्वालामुखी के मानव जीवन पर होने वाले प्रमुख प्रभाव इस प्रकार हैं –
ज्वालामुखी से विभिन्न स्थलाकृतियों की रचना होती है, जैसे मैदान, पठार, पर्वत आदि। इनसे हमें बहुमूल्य खनिज पदार्थों की प्राप्ति होती है। ज्वालामुखी से निकला लावा चारों ओर फैलकर कालान्तर में उपजाऊ मिट्टी का निर्माण करता है। शान्त ज्वालामुखी के मुख में वर्षा का जल भरने से झीलों का निर्माण होता है। ज्वालामुखी से कई लाभ के साथ-साथ हानियाँ भी होती हैं। ज्वालामुखी उद्गार से मानव, जीव-जन्तु, वनस्पति, कृषि क्षेत्र, मानव आवास एवं बड़े-बड़े नगर, गाँव जलकर नष्ट हो जाते हैं अथवा दबकर ध्वस्त हो जाते हैं। (4) भूकम्प किसे कहते हैं ? भूकम्प आने के कारण लिखिए
उत्तर:
भूकम्प – भूकम्प शब्द दो शब्दों से बना है – भू तथा कम्प, जिसका सामान्य अर्थ ‘पृथ्वी का कम्पन’ है। जिस तरह किसी शान्त जल में पत्थर का टुकड़ा फेंकने पर गोलाकार लहरें, केन्द्र से चारों ओर प्रवाहित होती हैं उसी तरह भूगर्भ उद्गम केन्द्र (गड़बड़ी वाले स्थान) से भूकम्प लहरें चारों ओर फैलती हैं। भूकम्प की उत्पत्ति जिस स्थान पर होती है, उसे ‘भूकम्प केन्द्र (फोकस)’ कहते हैं।
भूकम्प आने के कारण –
  • भूगर्भ में यदाकदा अचानक हलचल हो जाने के कारण पृथ्वी की सतह पर. भूकम्प आ जाते हैं।
  • तीव्र ज्वालामुखी उद्भेदन होने पर भी भूकम्प आते हैं।
  • कभी – कभी भूगर्भ में बनने वाली गैसों एवं जल वाष्प भी कमजोर भू-पटल को हिला देती है जिससे भूकम्प आते हैं।

(5) निम्नलिखित शैलों को दिये गये शैलों के प्रारूप में अंकित कीजिए
(1) संगमरमर
(2) कोयला
(3) ग्रेनाइट
(4) चूने का पत्थर
(5) बेसाल्ट
(6) हीरा
उत्तर:
शैलों का प्रारूप:

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