MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 27 हमारा जीवन और पर्यावरण

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 27 हमारा जीवन और पर्यावरण

MP Board Class 8th Social Science Chapter 27 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए –   (1) विघटनीय ठोस अपशिष्ट नहीं है – (क) सब्जी
(ख) फल
(ग) कागज
(घ) पॉलीथिन बैग। उत्तर:
(घ) पॉलीथिन बैग।   MP Board Class 8th Social Science Chapter 27 लघु उत्तरीय प्रश्न   प्रश्न 2.
(1) औद्योगिक अपशिष्ट क्या हैं ? इसके उदाहरण दीजिए।
उत्तर:
औद्योगिक इकाई में किसी वस्तु विशेष के निर्माण होने पर जो शेष कचरा रह जाता है वह औद्योगिक अपशिष्ट कहलाता है। यह अपशिष्ट ठोस, तरल या गैसीय हो सकते हैं। जैसे-कपड़ा रंगने में अधिक मात्रा में पानी चाहिए। जब यह पानी अपशिष्ट में छोड़ा जाता है, तो इसमें कई रसायन मिले होते हैं। (2) वस्तु निर्माण की कौन-कौनसी प्रक्रियाएँ हैं ?
उत्तर:
वस्तुओं का निर्माण तीन प्रक्रियाओं से होता है –

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  • संयोजन-विभिन्न भागों को जोड़कर अन्तिम उत्पाद तैयार करना संयोजन है। जैसे-साइकिल के पहियों, हैंडल, सीट, चेन एवं अन्य भागों को जोड़कर तैयार करते हैं।
  • परिवर्तन-परिवर्तन में कच्चे माल को नए माल या अन्तिम उत्पाद के रूप में परिवर्तित करते हैं। जैसे-वृक्षों को चीरकर लकड़ी बनाना।
  • निष्कर्षण-निष्कर्षण में कच्चे माल में से एक या दो अवयव निकाल लिए जाते हैं। जैसे-पेट्रोल से तेल अलग किया जाता है।

(3) उद्योगों के प्रमुख अवयव कौन-कौन से हैं ?
उत्तर:
अधिकतर उद्योगों के निम्नलिखित चार अवयव होते हैं –

  • पूँजी-प्रत्येक उद्योग को दो प्रकार की पूँजी की आवश्यकता होती है। भौतिक पूँजी (संसाधन) तथा आर्थिक पूँजी।
  • कच्चा माल-अधिकतर उद्योग प्राकृतिक संसाधनों द्वारा प्रदत्त कच्चे माल पर निर्भर हैं।
  • प्रौद्योगिकी-वर्तमान में प्रौद्योगिकी के विकास से अत्यधिक औद्योगिक निर्माण हुआ है।
  • श्रम-श्रम का सम्बन्ध कार्मिक शक्ति से है। श्रमिकों के समूह बनाए जाते हैं, जो अपने-अपने कार्य को मालिकों के साथ निर्धारित करते हैं।

MP Board Class 8th Social Science Chapter 27 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 3.
(1) कृषि एवं पशुपालन पर्यावरण को किस प्रकार प्रभावित करते हैं ?
उत्तर:
आज कृषि में उत्पादन वृद्धि के लिए उर्वरकों का प्रयोग दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। रासायनिक उर्वरक यद्यपि खाद्यान्नों का उत्पादन बढ़ाने में लाभदायक हैं, लेकिन पर्यावरण पर ये हानिकारक प्रभाव डाल रहे हैं। सामान्यतः खेत में डाले गए कुल रासायनिक उर्वरक का 60 प्रतिशत अंश ही पौधों द्वारा उपयोग में लाया जाता है। अवशेष उर्वरक जो मिट्टी में रह जाते हैं, वे वर्षा के जल में मिलकर खेतों के निकट स्थित तालाबों, नदियों या झीलों में पहुँच जाते हैं। वहाँ ये उन जल स्रोतों को प्रदूषित करते हैं तथा मिट्टी में रिसकर भू-जल को भी प्रदूषित करते हैं। – बढ़ती जनसंख्या का दबाव पशुधन पर भी पड़ रहा है। पशु उत्पादों की माँग दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। वैज्ञानिक इन उत्पादों की वृद्धि पर कठोर परिश्रम कर रहे हैं। उन्होंने पशुओं पर गहन शोध किया है जैसे अधिक ऊन के लिए उन्नत किस्म की भेड़ों का पालन, क्लोन निर्माण कर पशुओं का कृत्रिम प्रजनन। इससे जैविक विविधता प्रभावित हो रही है। (2) ठोस अपशिष्टों के निपटारे की विधियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
ठोस अपशिष्ट के निपटारे की कई विधियाँ हैं –
1. पुनःउपयोग-यह प्राचीन विधि है, जिसमें अपशिष्ट वस्तुओं को पुनःउपयोग के योग्य बनाते हैं। सभी धात्विक वस्तुओं को पिघलाकर नई वस्तुएँ बन सकती हैं। शीशा और कागज 100 प्रतिशत पुनः उपयोग योग्य हैं। 2. भूमि में दबाना-यह भूमि पर अपशिष्ट के निपटारे की अत्यन्त प्रचलित विधि है, क्योंकि इसमें मुख्य खर्च केवल परिवहन का है। आधुनिक भूमि भराव में ठोस अपशिष्ट को पतली परतों में बिछाया जाता है। बीच-बीच में मिट्टी की परत बिछाई जाती है और उसे भी बुलडोजर से ठोस बनाया जाता है। 3. कूड़ा खाद बनाना-इस प्रक्रिया में अपशिष्ट की छंटाई की जाती है ताकि वही पदार्थ चुने जाएँ, जिन्हें अपघटित किया जा सकता है; जैसे-कागज, लकड़ी, पत्ते आदि। अपशिष्ट को इस प्रकार की परतों में रखते हैं कि सुगमता से वायु संचार हो सके। थोड़ा पानी डाला जाता है ताकि अपघटन सुगम हो सके। कुछ दिन तक सामग्री या ढेर को ढंक दिया जाता है। लगभग तीन सप्ताह के बाद इसे खाद के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। 4. भस्मक-भस्मक में अपशिष्ट को जलाया जाता है, ताकि इसका भार तथा आयतन कम हो जाए। इससे लगभग 90 प्रतिशत अपशिष्ट नहीं हो जाते हैं। (3) पर्यावरण सहयोगी प्रौद्योगिकी से आप क्या समझते हैं ? समझाइए।
उत्तर:
पर्यावरण सहयोगी प्रौद्योगिकी से आशय उस प्रौद्योगिकी से है जो पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुँचाती है, जिसे आधुनिक प्रौद्योगिकी भी कहा जाता है। आधुनिक प्रौद्योगिकी, उद्योगों को सुरक्षित व मितव्ययी बना सकती है, जैसे –

  • ऑटोमोबाइल उद्योग का कबाड़ अन्य धातुओं से मिश्रित कर नई धातु बनाने में उपयोगी हो सकता है। इन्हें आधुनिक प्रौद्योगिकी द्वारा प्रभावी रूप से पुनः उपोग के योग्य बनाया जा सकता है।
  • उद्योगों की चिमनियों द्वारा हानिकारक उत्सर्जक वायु प्रदूषण का एक प्रमुख कारण है। धूम्रमार्जक औद्योगिक संयन्त्रों द्वारा हानिकारक गैसों तथा प्रदूषक तत्वों को दूर किया जा सकता
  • कुछ उद्योगों द्वारा रासायनिक अपशिष्ट नदियों तथा तालाबों में प्रवाहित कर दिए जाते हैं। आधुनिक प्रौद्योगिकी में कई ऐसी तकनीकें विकसित हो गई हैं, जिनसे इन अपशिष्टों के हानिकारक तत्वों को कम करके उनका पुनः उपयोग किया जा सकता है।
  • परिवहन क्षेत्र में सी.एन.जी. का प्रयोग बढ़ रहा है, क्योंकि यह अन्य ऊर्जा स्रोतों की अपेक्षा न्यूनतम प्रदूषण फैलाती
  • आधुनिक कम्प्यूटर पर आधारित मशीनें सटीक तथा मितव्ययी सिद्ध हुई हैं। ये ऊर्जा बचाती हैं तथा न्यूनतम अपशिष्ट छोड़ती हैं।
  • आधुनिक ऊर्जा संरक्षण के स्रोतों में कुछ पौधों की पत्तियों का उपयोग बायो डीजल बनाने में किया जा रहा है तथा इस पर शोध भी जारी है।

  (4) राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पर्यावरणीय मुद्दों का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
भारत में औद्योगीकरण 70 तथा 80 के दशक में त्वरित हुआ। इसी के साथ कई संगठन, समितियाँ तथा विभाग स्थापित हुए, इनमें सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठन दोनों ही शामिल हैं। शीघ्र तथा प्रभावकारी परिणामों के लिए भारत सरकार ने कई कानून बनाए हैं, जैसे-पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, फैक्ट्री संशोधन अधिनियम, केन्द्रीय मोटरवाहन सम्बन्धी नियम आदि। जैसे – यदि कोई फैक्ट्री अपशिष्ट का समुचित निपटारा न करके प्रदूषण का कारण बन रही है तो ये बोर्ड उसे बन्द करने का आदेश दे सकते हैं। स्थानीय स्तर पर नगर पालिका तथा नगर निगम अपशिष्ट के निपटारे में सीधी भूमिका निभाते हैं। औद्योगिक ठोस अपशिष्ट के लिए विभिन्न स्थानों पर बड़े कूड़ेदान स्थापित किए जाते हैं। प्रतिदिन इनको उठाने की व्यवस्था की जाती है। नगर का मल – जल नगर के दूरस्थ भागों में ले जाकर छोड़ा जाता है। अपशिष्टों के निपटारे में सामुदायिक भूमिका भी महत्वपूर्ण है। लोगों को सड़कों या पार्कों में कूड़ा नहीं फेंकना चाहिए और पानी का जमाव नहीं होने देना चाहिए। यह हम सभी की अनिवार्य जिम्मेदारी भी है।

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