MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष

MP Board Class 8th Social Science Solutions Chapter 3 ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष

MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 अभ्यास प्रश्न

प्रश्न 1.
निम्नलिखित प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर लिखिए
(1) कौन-सा विद्रोह आदिवासी विद्रोह नहीं था ?
(क) वेल्लोर विद्रोह
(ख) भील विद्रोह
(ग) संथाल विद्रोह
(घ) मुण्डा विद्रोह
उत्तर:
(क) वेल्लोर विद्रोह   (2) सन् 1857 ई. के स्वतन्त्रता संग्राम में निम्नलिखित में से किसने भाग नहीं लिया ?
(क) रानी लक्ष्मीबाई
(ख) तात्या टोपे
(ग) बहादुरशाह जफर
(घ) दिलीप सिंह
उत्तर:
(घ) दिलीपसिंह, (3) अंग्रेजों की किस नीति के कारण भीलों ने विद्रोह किया था ?
(क) उद्योग नीति
(ख) कृषि नीति
(ग) धार्मिक नीति
(घ) राज्य में हस्तक्षेप
उत्तर:
(ख) कृषि नीति।   MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 अति लघु उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 2.
(1) संन्यासी विद्रोह का उल्लेख किस पुस्तक में मिलता है ?
उत्तर:
संन्यासी विद्रोह का उल्लेख बंकिमचन्द्र चटर्जी की पुस्तक ‘आनन्द मठ’ में मिलता है।   (2) संथाल विद्रोह का नेतृत्व किसने किया था ?
उत्तर:
संथाल विद्रोह का नेतृत्व नेता सीदो तथा कान्हू ने किया था। (3) वहाबी आन्दोलन के प्रवर्तक कौन थे ?
उत्तर:
रायबरेली के सैय्यद अहमद वहाबी आन्दोलन के प्रवर्तक थे।   MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 लघु उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 3.
(1) कोल विद्रोह कब और कहाँ हुआ था ?
उत्तर:
कोल विद्रोह 1831 ई. के आस-पास सिंहभूमि, राँची, पलामू, हजारी बाग, मानभूमि आदि स्थानों पर हुआ था। (2) भारत के उन क्षेत्रों का नाम बताइए जहाँ सन् 1857 ई. का आन्दोलन काफी व्यापक था ?
उत्तर?:
1857 ई. का आन्दोलन दिल्ली, अवध, रुहेलखण्ड, बुन्देलखण्ड, इलाहाबाद के आस-पास के इलाकों, आगरा, मेरठ और पश्चिमी बिहार में काफी व्यापक और भयंकर था।   MP Board Class 8th Social Science Chapter 3 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न प्रश्न 4.
(1) संथाल विद्रोह का वर्णन कीजिए।
उत्तर:
आदिवासियों द्वारा कम्पनी शासन के विरुद्ध किए गए विद्रोह में सबसे सशक्त विद्रोह संथालों का था। भागलपुर से लेकर राजमहल के बीच का क्षेत्र दामन-ए-कोह के नाम से जाना जाता था। यह संथाल बहुल क्षेत्र था। संथालों ने भूमिकर अधिकारियों के दुर्व्यवहार के विरुद्ध विद्रोह किया। यह विद्रोह संथाल नेता सीदो तथा कान्हू के नेतृत्व में आरम्भ हुआ। इन्होंने अपने क्षेत्रों में कम्पनी के शासन के अन्त की घोषणा कर दी। एक कड़े संघर्ष के बाद 1856 ई. में ही इस विद्रोह को दबाया जा सका। (2) सेना के भारतीय सिपाहियों में असन्तोष फैलने के क्या कारण थे ?
उत्तर:
सेना के भारतीय सिपाहियों में असन्तोष फैलने के निम्नलिखित प्रमुख कारण थे –

  • ब्रिटिश फौज में भारतीय सिपाहियों की तरक्की की कोई भी गुंजाइश नहीं थी।
  • फौज के सभी उच्च पद अंग्रेज अफसरों के लिए सुरक्षित थे। .
  • भारतीय सैनिकों एवं अंग्रेज सैनिकों की आमदनी में अत्यधिक अन्तर था।
  • अंग्रेज भारतीय सैनिकों को हेय दृष्टि से देखते थे।
  • उस समय चर्बी वाले कारतूसों से हिन्दू और मुसलमान सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को बड़ा आघात पहुँचा।
  • सैनिकों के इन कारतूसों के प्रयोग करने से मना करने पर उन्हें कठोर और लम्बी सजा दे दी गई यहाँ तक कि मंगल पांडे को मार डाला गया।

(3) सन् 1857 ई. के आन्दोलन की असफलता के मुख्य कारण क्या थे ?
उत्तर:
सन् 1857 ई. के आन्दोलन की असफलता के मुख्य कारण निम्नलिखित थे –

  • तत्कालीन भारत में राजनैतिक चेतना की कमी एवं एकता का अभाव।
  • आन्दोलनकारियों द्वारा मुगल बादशाह को भारत का सम्राट मान लेना।
  •  विभिन्न आन्दोलनकारियों में एकजुटता एवं आपसी तालमेल का अभाव।
  • ब्रिटिश शासन के प्रति सब जगह तीव्र असन्तोष का अभाव एवं कुछ लोगों द्वारा शासन का साथ देना।
  • विद्रोह का नेतृत्व राजाओं और जमींदारों के हाथों में होना।
  • ब्रिटिश शासन के पास बेहतर हथियार, सेना एवं संचार व्यवस्था का होना आदि।

(4) टिप्पणी लिखिए –
(1) संन्यासी विद्रोह
(2) वहाबी आन्दोलन।
उत्तर:
(1) संन्यासी विद्रोह – नागरिक विद्रोह में महत्वपूर्ण बंगाल के संन्यासियों का विद्रोह था। 1770 ई. में बंगाल में पड़े अकाल ने वहाँ की जनता को कंगाल कर दिया था। अंग्रेजी सरकार की उदासीनता, आर्थिक लूट और तीर्थ स्थानों पर लगे प्रतिबन्धों ने सदैव से शान्त संन्यासियों को भी विद्रोह करने पर विवश कर दिया। उन्होंने आम जनता के साथ मिलकर सरकार की कोठियों, बस्तियों और किलों पर आक्रमण कर दिया। कम्पनी सरकार के गवर्नर वारेन हेस्टिंग्ज के अथक प्रयास के बाद ही संन्यासी विद्रोह को शान्त किया जा सका। संन्यासी विद्रोह का उल्लेख बंकिमचन्द्र चटर्जी ने अपनी पुस्तक ‘आनन्द मठ’ में किया है। (2) वहाबी आन्दोलन – अंग्रेजी प्रभुसत्ता को सबसे गहरी चुनौती वहाबी आन्दोलन से मिली। वहाबी आन्दोलन 19वीं शताब्दी के चौथे दशक से सातवें दशक तक चला। रायबरेली के सैय्यद अहमद वहाबी इसके प्रवर्तक थे। वह इस्लाम में किसी है भी तरह के परिवर्तन और सुधारों के विरुद्ध थे। सैय्यद अहमद ने पंजाब में सिक्ख राज्य के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और 1849 में पंजाब पर कम्पनी के अधिकार से वहाबी आन्दोलन अंग्रेजों के विरुद्ध हो गया।

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