MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 11 Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr

MP Board Class 9th General English The Spring Blossom Solutions Chapter 11 Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Textual Exercises

Word Power

(A) Rearrange the jumbled letters into meaningful words and write the words in alphabetical order.
(सार्थक शब्द बनाओ व उन्हें क्रम से लिखो।)
Answer:

  1. nylo – only
  2. renve – never
  3. vocie – voice
  4. ollgasw – gallows
  5. talra – altar.

The words is alphabetical order are altar, gallows, never, only, voice

(B) Supply the synonyms for the words given below.
(दिये गये शब्दों के पर्यायवाची दीजिए)
Answer:

  1. anxiety – distress
  2. call – cry
  3. brave – courageous
  4. motherland – nation
  5. grief – sorrow.

(C) Match the words in column ‘A’ with the meanings in column B.
(सुमेलित करो।)


Answer:
(i) → (c)
(ii) → (e)
(iii) → (d)
(iv) → (a)
(v) → (b)

How Much Have I Understood?

(A) Answer the following questions.
(निम्न प्रश्नों के उत्तर दो।)

Question 1.
Ram Prasad ‘Bismil’ was a great patriot. you find any other quality in him? Describe.
(राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ अ ग्रेट पेट्रिअट। डू यू फाइन्ड एनी अदर क्वॉलिटी इन हिम? डिस्क्राइब।)
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ एक महान देश भक्त थे। क्या उनके अन्दर इसके अतिरिक्त कोई और भी गुण था? वर्णन करें।
Answer:
Yes, Ram Prasad ‘Bismil’ was a great poet also. He has written several inspiring verses. At the end of his autobiography, he has written some selected poems which are full of patriotic fervour.
(यस, रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ इ ग्रेट पोएट ऑल्सो। ही हैज़ रिटन सैवरल इन्सपाइरिंग वर्सेस। एट द ऍन्ड ऑफ हिज़ ऑटोबायोग्राफी, ही हैज़ रिटन सम सिलेक्टिड पोएम्स व्हिच आर फुल ऑफ पेट्रिऑटिक फर्वर।)
हाँ, राम प्रसाद बिस्मिल’ एक महान कवि भी थे। उन्होंने कई प्रेरणादायक कविताएँ लिखी हैं। अपनी आत्मकथा के अन्त में उन्होंने कुछ कविताएँ लिखी हैं जो देशभक्ति की भावना से परिपूर्ण हैं।

Question 2.
‘Bismil’ joined the band of martyrs. What do you understand by the phrase “the band of martyrs?”
(‘बिस्मिल’ जॉइण्ड द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स व्हॉट ड्र यू अण्डरस्टैण्ड बाइ द फ्रेज़ “द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स”?)
‘बिस्मिल,’ शहीदों की टोली में सम्मिलित हो गये। शहीदों की टोली से आप क्या समझते हो?
Answer:
In the freedom movement of India, several persons became fighters against the British rule. These persons did not care for their lives even. These persons were called the “band of martyrs”
(इन द फ्रीडम मूवमेण्ट ऑफ इण्डिया सैवरल पर्सन्स बिकेम फाईटर्स अगेन्स्ट द ब्रिटिश रूल। दीज़ पर्सन्स डिड नॉट केयर फॉर देयर लाइव्स ईवन। दीज़ पर्सन्स वर कॉल्ड “द बैण्ड ऑफ मार्टियर्स”।)
भारत की आजादी के आन्दोलन में, ब्रिटिश शासन के खिलाफ कई व्यक्ति योद्धा बने थे। ये लोग अपनी जान की भी परवाह नहीं करते थे। इन्हीं को “शहीदों की टोली’ कहा गया।

Question 3.
‘Bismil’ along with other stalwarts helped revolutionaries in many other ways. Do you agree with the statement? Explain in brief.
(‘बिस्मिल’ अलाँग विद अदर स्टॉलवर्ट्स हैल्पड रिवॉल्यूशनरीज इन मैनी वेज़। डू यू एग्री विद द स्टेटमेण्ट? एक्सप्लेन इन ब्रीफ।)
‘बिस्मिल’ ने अपने अन्य विश्वस्त साथियों के साथ क्रान्तिकारियों की कई अन्य प्रकार से मदद की। व्याख्या करो।
Answer:
Yes, the stalwarts provided shelter to revolutionaries, printed literature and made hand bombs.
(यस, द स्टॉलवर्ट्स प्रोवाइडिड शेल्टर ट्र रिवॉल्यूशनरीज प्रिन्टेड लिट्रेचर एण्ड मेड हैण्ड बॉम्बस्।)
हाँ, क्रान्ति के समर्थक क्रान्तिकारियों को शरण देते थे, साहित्य छपवाते थे व हाथ से फेंके जाने वाला बम बनाते थे।

Question 4.
What incidents made ‘Bismil’ and his followers inmortal figures of India? Give some references from the text.
(व्हाट इन्सीडेन्ट्स मेड ‘बिस्मिल’ एण्ड हिज़ फॉलोअर्स इमॉर्टल फिगर्स ऑफ इण्डिया? गिव सम रेफ्रेन्सेस फ्रॉम द टेक्स्ट।)
कौन-सी घटनाओं ने ‘बिस्मिल’ और उनके साथियों को भारत की अमर विभूतियाँ बना दिया? पाठ के आधार पर कारण दो।
Answer:
Ram Prasad Bismil’ was a brave revolutionary, who gave up his life smilingly for the sake of motherland. The Kakori train incident made him and his followers immortal figures of India.
(राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ वॉज़ अ ब्रेव रिवॉल्यूश्नरी, हू गेव अप हिज लाइफ स्माइलिंग्ली फॉर द सेक ऑफ मदरलैण्ड। द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट मेड हिम एण्ड हिज़ फॉलोअर्स इमॉर्टल फिगर्स ऑफ इण्डिया।)
राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ एक बहादुर क्रान्तिकारी थे जिन्होंने मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। वे व उनके साथी काकोरी ट्रेन काण्ड के कारण भारत की अमर विभूतियाँ बन गए।

Question 5.
Every line of ‘Bismil’s poems throbs with poetic fervour. How far do you agree with the remark? Explain in brief.
(एवरी लाइन ऑफ ‘बिस्मिल’ पोएम्स थ्रॉब्स विद पोएटिक फर्वर। हाउ फार डू यू एग्री विद द रिमार्क? एक्सप्लेन इन ब्रीफ।)
‘बिस्मिल’ की कविताओं की प्रत्येक पंक्ति काव्यात्मक उत्साह एवं जोश से परिपूर्ण है। आप इस बात से कहाँ तक सहमत हैं? संक्षिप्त में व्याख्या करिए।
Answer:
It is true that Bismil’s poems throb with poetic fervor. In one of the poem he prays, “Even if I have to face death a thousand times for the sake of my motherland, it shall not sadden me.”
(इट इज़ टू दैट ‘बिस्मिल्स’ पोएम्स थ्रॉब विद पोएटिक फरवर। इन वन ऑफ द पोएम ही प्रेज़, “ईवन इफ आइ हैव टू फेस डैथ अ थाउजण्ड टाइम्स फॉर द सेक ऑफ माइ मदरलैण्ड। इट शैल नॉट सैडन मी।”)
यह सत्य है कि बिस्मिल की कविताएँ काव्यात्मक उत्साह एवं जोश से परिपूर्ण हैं। एक कविता में उन्होंने कहा है कि यदि मातृभूमि के लिए उन्हें हज़ार बार मरना पड़े तब भी उन्हें दुःख नहीं होगा।

Question 6.
What was Bismil’s contribution in the Kakori train incident?
(व्हॉट वॉज़ बिस्मिल्स कॉन्ट्रीब्यूशन इन द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट?)
काकोरी ट्रेन काण्ड में बिस्मिल का क्या योगदान था?
Answer:
Bismil was the brave leader of the Kakori train incident.
(बिस्मिल वॉज़ द ब्रेव लीडर ऑफ द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट।)
बिस्मिल काकोरी ट्रेन काण्ड के बहादुर नायक थे।

Question 7.
How did the Kakori train incident affect the British in India?
(हाउ डिड द काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट अफैक्ट द्र ब्रिटिश इन इण्डिया?)
काकोरी ट्रेन काण्ड ने भारत में अंग्रेजों को किस प्रकार प्रभावित किया?
Answer:
This extremely well-planned incident jolted the British government.
(दिस एक्स्ट्रीमली वेल प्लैन्ड इन्सीडेण्ट जोल्टेड द ब्रिटिश गर्वनमेण्टं।)
इस अत्यन्त सुनियोजित काण्ड ने अंग्रेज सरकार की चूलें हिला दी।

Question 8.
Describe the qualities of Bismil’s mother that astounded the officials of the prison.
(डिस्क्राइब द क्वॉलिटीज ऑफ बिस्मिल्स मदर दैट एस्टाउण्डेड द ऑफिशियल्स ऑफ द प्रिजन।)
बिस्मिल की माँ के उन गुणों का वर्णन करो जिसने जेल के अधिकारियों को भौंचक्का कर दिया।
Answer:
Bismil’s mother was a brave lady. She was proud of her son. She went to the prison to meet her son who had to face death, the next day. When Bismil saw his mother he thought it was the last time he could see and talk to her. Tears came in the eyes of Bismil. His mother thought that Bismil was afraid of his death. So she rebuked him. The officials were astounded at the firmness of his mother.

(बिस्मिल्स मदर वॉज़ अ ब्रेव लेडी। शी वॉज़ प्राऊड ऑफ हर सन। शी वेन्ट टू द प्रिजन टू मीट हर सन हू हैड टू फेस डैथ द नेक्स्ट डे। व्हेन बिस्मिल सॉ हिज़ मदर ही थॉट इट वॉज द लास्ट टाइम ही कुड सी एण्ड टॉक टू हर। टीयर्स केम इन द आईज ऑफ बिस्मिल। हिज़ मदर थॉट दैट बिस्मिल वॉज़ अफ्रेड ऑफ डैथ। सो शी रिब्यूक्ड हिम। द ऑफिशियल्स वर एस्टाउण्डेड एट द फर्मनेस ऑफ हिज़ मदर।)

बिस्मिल की माँ एक बहादुर स्त्री थीं। उन्हें अपने पुत्र पर गर्व था। फाँसी के एक दिन पूर्व वह उनसे मिलने जेल गईं। जब बिस्मिल ने उन्हें देखा तो यह सोचकर कि वे अन्तिम बार अपनी माँ को देख रहे हैं, उनकी आँखों से अश्रु छलक आए। माँ ने सोचा कि उनका पुत्र मृत्यु से डर रहा है। इस पर माँ ने उन्हें झिड़क दिया। उनकी माँ की इस दृढ़ता पर जेल अधिकारी भौंचक्के रह गये।।

(B) Who said these words to whom
(किसने, किससे कहा।)

Question 1.
“Even if I have to face death a thousand times for the sake of my motherland it shall not sadden me.”
(ईवन इफ़ आइ हैव टू फेस डैथ अ थाउजन्ड टाइम्स फॉर द सेक ऑफ माइ मदरलैण्ड इट शैल नॉट सैडन “मी।)
Answer:
Ram Prasad Bismil to.God.
(राम प्रसाद बिस्मिल टू गॉड।)

Question 2.
“Who are you?”
(“हू आर यू?”)
Answer:
The guard to the young man.
(द गार्ड ढू द यंग मैन।)

Question 3.
“Permit him also, brother.”
(परमिट हिम ऑल्सो ब्रढ़र।)
Answer:
Bismil’s mother to the guard.
(बिस्मिल्स मदर दू द गार्ड।)

Question 4.
“Why did you take up such activities?”
(“व्हाइय डिड यू टेक अप सच एक्टिविटीज?”)
Answer:
Bismil’s mother to Bismil.
(बिस्मिल्स मदर दू बिस्मिल्स)

Question 5.
“These are not tears of fear the fear of death.”
(“दीज़ आर नॉट टीयर्स ऑफ फिअर-द फिअर ऑफ
Answer:
Bismil to his mother.
(“बिस्मिल्स दू हिज़ मदर”)

Language Practice

Combine the given pairs of sentences.
(दिए गए वाक्य युग्मों को जोड़िए)

(i) (a) My sister is wearing a new frock.
(b) The frock is pink.
Answer:
My sister is wearing a frock which is pink.

(ii) (a) She is my teacher.
(b) She teaches English.
Answer:
She is my teacher who teaches English.

(iii) (a) I never touch these things.
(b) The things are prohibited.
Answer:
I never touch things which are prohibited.

(iv) (a) I am looking for Sharda.
(b) Her book is with me.
Answer:
I am looking for Sharda whose book is with me.

Listening Time

Here is a conversation between a girl Shreya and her teacher. Talk in pairs. One student will play the role of the teacher and the other one of the students.
(दिए गए वर्तालाप को बोलिए।)
Answer:
Students can do themselves.
(छात्र स्वयं करें।)

Speaking Time

(A) Read aloud with correct pronunciation each pair of words twice.
(दिए गए शब्दों को पढ़ो।)
Answer:
live, leave – लिव, लीव
hill, heel – हिलं, हील
lip, leap – लिप, लीप
this, these – दिस, दीज़
bit, beat – बिट, बीट
bid, bead – बिड, बीड
sick, seek – सिक, सीक

(B) Now read these pairs of sentences aloud.
(दिए गए वाक्यों को पढ़ो।)
Answer:
We are giving the pronunciation of the given sentences.
(1) Will you fill it, please?
विल यू फिल इट, प्लीज़?
Will you feel it, please?
विल यू फील इट, प्लीज़?

(2) We’re going to live here.
वी ओर गोइंग टू लिव हिअर।
We’re going to leave this place.
वी ओर गोइंग टू लीव दिस प्लेस।

(3) Can you see the ship?
कैन यू सी द शिप?
Can you see the sheep?
कैन यू सी द शीप?

(4) That’s a high hill.
दैट्स अ हाइ हिल।
That’s a high heel.
दैट्स अ हाइ हील।

(5) Would you like to have this?
वुड यू लाइक टू हैव दिस?
Would you like to have these?
वुड यू लाइक टू हैव दीज़?

Read the given sentences twice.
(दिए गये वाक्यों को दो बार पढ़ो।)
Answer:
We are giving the pronunciation of the given sentences :
(1) If you eat that piece of meat you’ll feel sick.
इफ यू ईट दैट पीस ऑफ मीट यू विल फील सिक।

(2) On the peak, the leaves are green in winter.
ऑन द पीक, द लीव्स आर ग्रीन इन विन्टर।

(3) Don’t drink from the cup the : cup is chipped.
डोन्ट ड्रिंक फ्रॉम द कप : द कप इज़ चिप्ड।

(4) The ship sprang a leak as it was leaving harbour.
द शिप स्प्रंग अ लीक एज़ इट वाज़ लीविंग हार्बर।

(5) I don’t think we’ll have a picnic this week.
आइ डोन्ट थिंक वी विल हैव अ पिकनिक दिस वीक।

Writing Time

Write a composition on any one of the freedom fighters you admire the most.
(अपने प्रिय क्रान्तिकारी के विषय में लिखो।)
Answer:
Students can write about the freedom fighter whom they admire themselves.
(छात्र अपने प्रिय क्रान्तिकारी के विषय में स्वयं लिखें।)

Things to do

Collect different types of pictures showing freedom fighters. Discuss in your class about their contribution in achieving freedom and write a paragraph about 5 freedom fighters.
(विभिन्न क्रान्तिकारियों की तस्वीरें इकट्ठी करो। उनके आजादी में योगदान की चर्चा करो व उन परं एक गद्यांश लिखो।)
Answer:
Students can collect the pictures of various freedom fighters like Bhagat Singh, Chandra Shekhar Azad, Mahatma Gandhi, Subhash Chandra Bose etc., themselves and write about them.

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Difficult word Meanings

Ram Prasad ‘Bismil’ – The Great Martyr Summary, Pronunciation & Translation

[1] Ram Prasad ‘Bismil’ was one of the great Indian freedom fighters who also participated in the Kakori train incident. He was also a great poet and had written several inspiring verses. He was prosecuted by the British Government in India. Ram Prasad ‘Bismil’ joined the band of martyrs who dreamt of a free India and made the supreme sacrifice. ‘Bismil’, along with stalwarts like Ashfaqullah Khan, Chandra Shekhar Azad, Bhagwati Charan, Raj Guru and others organised several upheavals against the British; they printed literature, provided shelter to revolutionaries, made hand bombs and were a constant source of worry to the British Government. They are most remembered for the Kakori train incident and the bombing of the Punjab assembly.

(रामप्रसाद बिस्मिल वाज़ वन ऑफ द ग्रेट इंडियन फ्रीडम फाइटर्स हू अल्सो पार्टिसिपेटेड इन द काकोरी ट्रेन इन्सिडेन्ट। ही वाज़ अल्सों अग्रेट पोएट एण्ड हैड रिटन सेवेरल इंसपायरिंग वर्सेस। ही वाज प्रासीक्यूटेड बाय द ब्रिटिश गवर्नमेंट इन इंडिया। राम प्रसाद ‘बिस्मिल’ जाइन्ड द बैंड ऑफ मारटिर्स हू ड्रीम्ट ऑफ अ फ्री इंडिया एण्ड मेड दं सुप्रीम सेक्रिफाइस। ‘बिस्मिल’ अलांग विद स्टालवा लाइक अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण, राजगुरू एण्ड आदर्स आर्गेनाइज्ड सेवेरल अप हीवल्स अगेन्स्ट द ब्रिटिश; दे प्रिन्टेड लिटरेचर, प्रोवाइडेड शेल्टर टु, रिवाल्यूशनरीज़, मेड हैंड बाम्ब्स एण्ड वर अ कान्सन्ट सॉर्स ऑफ वरी टु द ब्रिटिश गवर्नमेंट। दे आर मोस्ट रिमेम्बर्ड फोर द काकोरी ट्रेन इन्सिडेन्ट एण्ड द बॉम्बिंग ऑफ द पंजाब असेम्बली।)

हिन्दी अनुवाद :
रामप्रसाद बिस्मिल भारत के महान् स्वतन्त्रता संग्राम सेनानियों में से एक थे जिन्होंने काकोरी रेल घटना में भाग लिया था। वे एक महान कवि भी थे और उन्होंने कई प्रेरणादायक कविताएँ लिखी थीं। उन पर भारत में ब्रिटिश सरकार ने मुकदमा चलाया था। रामप्रसाद बिस्मिल शहीदों के ऐसे दल से जुड़ गये जो भारत को स्वतन्त्र कराने के सपने देखते थे और अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार रहते थे। रामप्रसाद बिस्मिल ने अशफाक उल्ला खान, चन्द्रशेखर आजाद, भगवतीचरण, राजगुरू जैसे दृढ़ निश्चयी व्यक्तियों के साथ ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध कई संगठित आन्दोलन किये। ये साहित्य छपते थे, स्वतन्त्रता सेनानियों को शरण देते थे, हस्त निर्मित बम बनाते थे और ब्रिटिश सरकार के लिये निरन्तर चिन्ता के स्रोत थे। वे काकोरी ट्रेन घटना व पंजाब विधानसभा में बम फोड़ने के लिए सदैव याद किये जाते हैं।

[2] ‘Bismil’ is the pen-name of Ram Prasad. As ‘Bismil’ he is well-known as a great revolutionary poet in Hindi. At the end of his autobiography, he has reproduced some selected poems. Every line of his poems throbs with patriotic fervour. In one poem, he prays, “Even it I have to face death a thousand times for the sake of my Motherland, it shall not sadden me. Oh Lord! Grant me a hundred births in Bharat. But grant me this, too, that each time I may give up my life in the service of the Motherland.”

(बिस्मिल इज़ द पेन नेम ऑफ रामप्रसाद। एज़ ‘बिस्मिल’ ही इज वेल नोन एज़ अ ग्रेट रिवोल्यूशनरी पोएट इन हिन्दी। एट द एण्ड ऑफ हिज़ ऑटोबायोग्राफी, ही हेज़ रिप्रोड्यूस्ड सम सेलेक्टेड पोएम्स। एवी लाइन ऑफ हिज़ पोएम्स थ्राब्स विद पेट्रियॉटिक फर्वर। इन वन पोएम, ही प्रेज, “इवन इफ आई हैव टु फेस डेथ अ थाउज़न्ड टाइम्स फोर द सेक ऑफ माय मदरलेण्ड, इट शैलं नाट सेडन मी। ओह लार्ड। ग्रांट मी अ हण्ड्रेड बर्थस इन भारत बट ग्रांट मी दिस, टू दैट ईच टाइम आइ मे गिव अप माई लाइफ इन द सर्विस ऑफ द मदरलैण्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
‘बिस्मिल’ रामप्रसाद का लेखकीय उपनाम था। ‘बिस्मिल’ नाम से वे हिन्दी में एक महान क्रान्तिकारी कवि थे। अपनी आत्मकथा के अन्त में उन्होंने कुछ चुनिन्दा (खास) कविताएँ लिखी हैं। उनकी कविताओं की प्रत्येक पंक्ति देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत हैं। “यदि मुझे अपनी मातृभूमि के लिए सौ बार भी मृत्यु का सामना करना पड़े तो मैं दु:खी नहीं होंऊँगा। हे ईश्वर! मुझे सैकड़ों जन्म भारत में देना। किन्तु यह भी वरदान देना कि मैं हर बार मातृभूमि की सेवा में अपने प्राण त्याग दूं।”

[3] In a poem written just before going to the gallows, he prays, “Oh Lord! Your will be done. You are unique. Neither my tears nor I will endure. Grant me this boon, that to my last breath and the last drop of my blood, I may think of you and be immersed in your work.”

(इन अ पोएम रिटन जस्ट बिफोर गोइंग टु द गेलोज, ही प्रेज़, “ओह, लार्ड! युअर विल बी डन। यू आर यूनिक। नाइदर. माई टीअर्स नार आई विल इन्ड्युअर। ग्रान्ट मी दिस बून, दैट टु माई लास्ट ब्रेथ एण्ड द लास्ट ड्रॉप ऑफ माई ब्लड, आई मे थिंक ऑफ यू एण्ड बी इम्मर्सड इन युअर वर्क।”)

हिन्दी अनुवाद :
एक कविता में जिसे फाँसी के लिये जाते हुए उन्होंने लिखी थी, वे प्रार्थना करते हैं, हे भगवान! आपकी इच्छा पूरी हो, आप अद्वितीय हो। न तो मेरे आँसू न ही मैं किसी कष्ट का अनुभव करते हैं। मुझे यह वरदान देना कि अपनी अन्तिम साँस तथा अपने रक्त की अन्तिम बूंद तक मैं आपके बारे में सोचूं एवं आपके कार्य में समाहित हो जाऊँ।

[4] Ram Prasad ‘Bismil’ was a brave revolutionary, who gave up his life smilingly for the sake of the Motherland. He was persecuted by an enraged foreign government, hunted by the police and betrayed by some fellow workers. He was the brave leader of the Kakori train incident. His poetry is also a lamp lighted at the altar of the Motherland. Kakori is a village near Lucknow. It became famous, because the attack on the train took place near Lucknow.

(रामप्रसाद ‘बिस्मिल’ वाज़ अ ब्रेव रिवोल्यूशनरी, हू गेव अप हिज़ लाइफ स्माइलिंगली फोर द सेक ऑफ द मदरलैण्ड। ही वाज़ प्रासिक्यूटेड बाय एन इनरेज्ड फॉरेन गवर्नमेंट, हण्टेड बाय द पोलिस एण्ड बिट्रेड बाय सम फेलो वर्कर्स। ही वाज़ द ब्रेव लीडर ऑफ द काकोरी ट्रेन इनसिडेंट। हिज़ पोएट्री इज़ अल्सो अ लैम्प लाइटेड एट द अल्टार ऑफ द मदरलैण्ड। काकोरी इज़ अ विलेज नियर लखनऊ। इट बिकेम फेमस, बिकाज़ द अटैक ऑन द ट्रेन टुक प्लेस नियर लखनऊ।)

हिन्दी अनुवाद :
रामप्रसाद बिस्मिल एक बहादुर स्वतन्त्रता सेनानी थे जिन्होंने अपनी मातृभूमि के लिये हँसते-हँसते अपने प्राणों का बलिदान कर दिया। उन पर एक क्रोधित विदेशी सरकार ने मुकदमा चलाया, पुलिस उनके पीछे पड़ी थी और कुछ साथी कार्यकर्ताओं ने उनके साथ गद्दारी की थी। फिर भी उन्होंने गुलामी से मुक्त होने के लिए आजादी की लौ को जलाये रखा। काकोरी रेल घटना के वे बहादुर नेता थे। उनकी कविताओं ने भी मातृभूमि की वेदी पर एक दीया जलाया था। लखनऊ के पास काकोरी गाँव है जो इसलिए प्रसिद्ध हुआ क्योंकि ट्रेन पर आक्रमण लखनऊ के पास इस स्थान पर हुआ था।

[5] It was the evening of the 9th of August 1925; the number eight down train was passing near Kakori. Ram Prasad and his nine revolutionary followers pulled the chain and stopped it. They took under their control the money belonging to the government deposited in the guard’s carriage. Excepting that one passenger was killed by an accidental shot, there was no bloodshed. This extremely well-planned incident jolted the government.

(इट वाज़ दी इवनिंग ऑफ द नाइन्थ ऑफ ऑगस्ट 1925; द नम्बर एट डाउन ट्रेन वाज़ पासिंग नियर काकोरी। रामप्रसाद एण्ड हिज़ नाइन रिवोल्यूशनरी फालोअर्स पुल्ड द चेन एण्ड स्टाप्ड इट। दे टुक अण्डर देअर कण्ट्रोल द मनी बिलांगिंग टु द गवर्नमेन्ट, डिपाजिटेड इन द गार्डज केरिज। एक्सेप्टिंग दैट वन पैसेन्जर वाज किल्ड बाय एन एक्सीडेण्टल शॉट, देअर वाज़ नो ब्लडशेड। दिस एक्स्ट्रीमली वेल प्लान्ड इन्सिडेंट जोल्टेड द गवर्नमेंट।)

हिन्दी अनुवाद :
9 अगस्त, 1925 की शाम थी; 8 नम्बर की डाउन ट्रेन काकोरी के पास से गुजर रही थी। रामप्रसाद और उसके 9 क्रान्तिकारी अनुयायियों ने ट्रेन को चेन खींच कर रोक दिया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के खजाने को अपने कब्जे में कर गार्ड के डिब्बे में रख लिया। केवल एक व्यक्ति जो एक घटनावश चली बन्दूक की गोली से मारा गया उसको छोड़कर जरा भी खून खराबा नहीं हुआ। इस सुनियोजित घटना ने ब्रिटिश शासन की चूल हिला दी।

[6] After a month of detailed preliminary inquiries and elaborate preparations, the government cast its net wide for the revolutionaries. Arrest warrants were issued not only against the ten participants but also against other leaders of the Hindustan Republic Association. With the lone exception of Chandra Shekhar Azad, all participants were caught. The case went on for over a year and a half. Ram Prasad, Ashfaqullah, Roshan Singh and Rajendra Lahiri, all four were sentenced to death. A strong campaign was organised throughout India to save the lives of these revolutionary heroes. Many of the leaders appealed to the British Government to show mercy to the condemned men. But the government was unyielding.

(आफ्टर अ मंथ ऑफ डिटेल्ड प्रिलिमिनरी इन्क्वायरीज़ एण्ड इलेबोरेट प्रिपरेशन्स, द गवर्नमेण्ट कास्ट इट्स नेट वाइड फोर द रिवोल्यूशनरीज। अरेस्ट वारंट्स वर इश्यूड नाट ओनली अगेन्स्ट द टेन पार्टीसिपेण्ट्स बट अल्सो अगेन्स्ट आदर लीडर्स ऑफ द हिन्दुस्तान रिपब्लिकन असोसिएशन। विद द लोन एक्सपेप्शन ऑफ चन्द्रशेखर आजाद, ऑल पार्टीसिपेण्ट्स वर काट। द केस वेण्ट ऑन फोर ओवर अं यीअर एण्ड अ हाफ। रामप्रसाद, अश्फाक उल्ला, रोशन सिंह एण्ड राजेन्द्र लाहिड़ी, ऑल फोर वर सेण्टेन्स्ड टु डेथ अस्ट्रांग केम्पेन वाज़ आर्गेनाइज्ड श्रू आउट इंडिया टु सेव द लाइब्ज ऑफ दीज़ रिवोल्यूशनरी हीरोज। मैनी ऑफ द लीडर्स अपील्ड टु द ब्रिटिश गवर्नमेंट टु शो मर्सी टु द कंडेम्ड मेन। बट द गवर्नमेंट वाज़ अनयील्डिंग।

‘हिन्दी अनुवाद :
एक महीने तक विस्तृत प्रारम्भिक पूछताछ व लम्बी चौड़ी तैयारी के बाद शासन ने क्रान्तिकारियों के लिए व्यापक जाल बुना। गिरफ्तारी के वारण्ट न केवल दस प्रतिभागियों के विरुद्ध बल्कि हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन के अन्य नेताओं के लिये जारी किए गए। केवल चन्द्रशेखर आजाद को छोड़कर सभी सहभागी पकड़े गए। मामला डेढ़ साल से ऊपर चला। रामप्रसाद, अशफाक उल्ला, रोशन सिंह और राजेन्द्र लाहिड़ी को मौत की सजा सुनाई गई। इन क्रान्तिकारी नायकों के लिए एक राष्ट्रव्यापी आन्दोलन आयोजित किया गया। कई नेताओं ने ब्रिटिश सरकार को इन विजित व्यक्तियों के प्रति दया दिखाने की अपील भी की। पर शासन टस से मस नहीं हुआ।

[7] It was the 18th of December 1927. A middle-aged lady was waiting at the main gate of the Gorukhpur Central Jail. She was eagerly waiting to be called into the prison. By that time, her husband also arrived there. He was surprised that his wife was already there before him. He also sat down to wait for the call. A young man came there. He was not related to them. He knew that the couple would be permitted to enter the prison. But how should be manage to enter the prison? This was his problem. The officials of the prison called in the husband and the wife. The young man followed them. The guard stopped him and rudely asked, “Who are you?” “Permit him also, brother. He is my sister’s son.” the lady said in an entreating voice. The guard relented.

(इट वाज़ द एट्टीन्थ ऑफ दिसेम्बर 1927 (नाइन्टीन ट्वेन्टी सेवन) अ मिडिल एजेड लेडी वाज़ वेटिंग एट द मैन गेट ऑफ द गोरखपुर सेंट्रल जेल। शी वाज़ ईगरली वेटिंग टु बी काल्ड इन टू द प्रिजन। बाय दैट टाइम हर हसबैण्ड अल्सो अराइब्ड देअर ही वाज़ सरप्राइज़्ड दैट हिज़ वाइफ वाज़ अलरेडी देयर बिफोर हिम। ही आल्सो सेट डाउन टु वेट फॉर द काल। अ यंग मेन केम देअर। ही वाज़ नाट रिलेटेड टु देम। ही निउ दैट द कपल वुड बी परमिटेड टु इंटर द प्रिज़न? बट हाऊ सुड ही मैनेज टू एन्टर द प्रिज़न। दिस वाज हिज़ प्रॉब्लेम। द आफीशियल्स ऑफ द प्रिज़न काल्ड इन द हसबैण्ड एण्ड वाइफ। द यंग मैन फालोड देम। द गार्ड स्टाप्ड हिम एण्ड रूडली आस्क्ड “हू आर यू?” “परमिट हिम अल्सो, ब्रदर। ही इज माय सिस्टर्स सन”, |द लेडी सेड इन एन इंट्रीटिंग वाईस। द गार्ड रिलेन्टेड।।

हिन्दी अनुवाद :
18 दिसम्बर, 1927 का दिन था। एक मध्यम आयु की महिला गोरखपुर सेण्ट्रल जेल के मुख्य दरवाजे के सामने इन्तजार कर रही थी। वह अत्यन्त अधीरता से जेल में बुलावे का इन्तजार कर रही थी। उस समय उसके पति भी वहाँ आये। वे अपनी पत्नी के अपने से पहले आ जाने से आश्चर्य में थे। वे भी बैठकर बुलाने का इन्तजार करने लगे। एक नौजवान वहाँ आया जिसका उन दोनों से कोई सम्बन्ध नहीं था। वह जानता था कि पति-पत्नी को जेल में प्रवेश करने की अनुमति मिल जायेगी किन्तु वह जेल में कैसे प्रवेश करेगा। यह उसकी समस्या थी। जेल के अधिकारियों ने पति-पत्नी को बुलाया। नवयुवक भी उनके पीछे चला। गार्ड ने उसे रोका और बेरुखी से पूछा, “तुम कौन हो ?” “भैया उसे भी आने दो वह मेरी बहन का पुत्र है।” उसने प्रार्थनात्मक आवाज में कहा। गार्ड ने उसे जाने दिया।

[8] At the three entered the prison to visit a freedom fighter who was to face his death on the morrow’. The freedom fighter was brought there in chains. They were like ornaments on him. This was the last time that he could see his mother, the last time he could address her as ‘mother’. At this thought grief welled up in him. He stood speechless and tears rolled down his cheeks.

(ऑल द थ्री इन्टई द प्रिजन टु विज़िट अ फ्रीडम फाइटर हू वाज़ टु फेस हिज़ डेथ ऑन द मारो। द फ्रीडम फाइटर वाज़ ब्राट देअर इन चेन्स। दे वर लाइक आर्नामेंटस ऑन हिम। दिस वाज़ द लास्ट टाइम दैट ही कुड सी हिज़ मदर, द लास्ट टाइम ही कुड एड्रेस हर एज़ ‘मदर’। एट दिस थॉट ग्रीफ वेल्ड अप इन हिम। ही स्टुड स्पीचलैस एण्ड टीअर्स रॉल्ड डाउन हिज़ चीक्स।)

हिन्दी अनुवाद :
तीनों जेल में एक स्वतन्त्रता सेनानी से जिसे अगले दिन मौत का सामना करना था, मिलने हेतु प्रविष्ट हुए। स्वतन्त्रता सेनानी को जंजीरों से बँधा हुआ लाया गया। वे जंजीर उसके लिए आभूषणों के समान थी। यह अन्तिम बार था जब वह अपनी माँ को देख सकता था, अन्तिम बार वह उसे ‘माँ’ कहकर बुला सकता था। इस विचार से उसका मन दुःख से भर उठा। निर्वाक होकर वह खड़ा हो गया और उसके गालों पर आँसू बह निकले।

[9] In a firm voice the mother said, “What is this, my son? I had thought of my son as a great hero. I was thinking that the British Government would shiver at the very mention of his name. I never thought that my son would be afraid of death. If you can die only in this way, weeping, why did you take up such activities?”

The officials were astounded at the firmness of the mother. The freedom fighter replied, “Mother, dear, these are not tears of fear the fear of death. These are tears of joy-joy at beholding so brave a “mother!”

(इन अ फर्म वाईस द मदर सेड, “व्हाट इज़ दिस, माई सन, आई हैड थॉट ऑफ माय सन एज अ ग्रेट हीरो। आई वाज़ थिंकिंग दैट द ब्रिटिश गवर्नमेंट वुड शिवर एट द वेरी मेन्शन ऑफ हिज़ नेम। आई नेवर थॉट दैट माय सन वुड बी अफ्रेड ऑफ डेथ। इफ यू केन डाई ओनली इन दिस वे, वीपिंग, व्हाय डिड यू टेक अप सच एक्टीविटिज़?”

द आफिशियल्स वर अस्टाउन्डेड एट द फर्मनेस ऑफ द मदर। द फ्रीडम फाइटर रिप्लाईड, “मदर, डियर, दीज़ आर नाट टीअर्स ऑफ फीयर, द फीयर ऑफ डैथ। दीज़ आर टीअर्स ऑफ जाय-जाय एट बिहोल्डिंग सो ब्रेव अ मदर।”)

हिन्दी अनुवाद :
एक दृढ़ आवाज में माँ ने कहा, “मेरे बेटे, यह क्या है? मैंने अपने पुत्र को एक वीर नायक के रूप में सोचा था। मैं सोच रही थी कि मेरे पुत्र के नाम को सुनते ही ब्रिटिश सरकार काँप उठेगी। मैंने कभी यह नहीं सोचा था कि मेरा पुत्र भयभीत हो जायेगा-मृत्यु के डर से। अगर तुम इसी तरह रोते हुए मरना चाहते हो तो तुमने इस प्रकार का कार्य ही क्यों किया?”

माँ की इस दृढ़ता पर जेल के अधिकारी आश्चर्यचकित रह गए। स्वतन्त्रता सेनानी ने उत्तर दिया, “ये आँसू मृत्यु के भय के नहीं है। ये तो आनन्द के आँसू हैं-आनन्द एक ऐसी बहादुर माँ को पाकर।”

[10] The brave son of that brave mother was Ram Prasad Bismil. He was the leader of the famous Kakori train incident. The last meeting ended. Next morning Ram Prasad got up earlier than usual, bathed and said his morning prayers. He wrote his last letter to his mother. Then he sat down with calm mind awaiting his death.

(द ब्रेव सन ऑफ दैट ब्रेव मदर वाज़ रामप्रसाद बिस्मिल। ही वाज़ द लीडर ऑफ द फेमस काकोरी ट्रेन इन्सिडेण्ट। द लास्ट मीटिंग एन्डेड़। नेक्स्ट मार्निंग राम प्रसाद गॉट अप अर्लियर देन युज्वल, बाथ्ट एण्ड सेड हिज़ मार्निंग प्रेयर्स। ही रोट हिज़ लास्ट लेटर टु हिज़ मदर। दैन ही सैट डाउन विथ कॉम माइन्ड अवेटिंग हिज़ डेथ।)

हिन्दी अनुवाद :
उस बहादुर माँ का बहादुर बेटा था-रामप्रसाद बिस्मिल। वह प्रसिद्ध काकोरी ट्रेन घटना का नायक था। अन्तिम मिलन समाप्त हुआ। अगले दिन रामप्रसाद नियमति रूप के बजाय बल्कि जल्दी उठे, उसने स्नान किया और प्रात:कालीन प्रार्थना की। उसने अपनी माँ को अन्तिम पत्र लिखा। फिर वह शान्त भाव से मृत्यु की प्रतीक्षा करने लगे।

[11] The officials came and removed his chains. They look him from the prison-cell towards his death. He was completely untroubled and walked like a hero. The officials were amazed. As he moved to the gallows, he joyfully chanted ‘Vande Matram’ and ‘Bharat Mata Ki Jai’.At the top of his voice, he shouted, “Down with the British Empire’. Then he calmly recited prayers and embraced death.

(द आफीशियल्स केम एण्ड रिमूव्ड हिज़ चेन्स। दे टुक हिम फ्राम द प्रिज़न-सेल टुवर्ड्स हिज़ डेथ। ही वाज़ कम्पलीटली अनट्रब्लड एण्ड वाक्ड लाईक अ हीरो। द आफीशियल्स वर अमेज्ड। एज़ ही मूव्ड टु द गेलोज, ही जायफुल्ली चान्टेड “वन्दे मातरम्” एण्ड “भारत माता की जय”। एट द टॉप ऑफ हिज़ वॉइस ही शाउटेड “डाउन विद द ब्रिटिश एम्पायर।” देन ही कामली रिसाइटेड प्रेयर्स एण्ड इम्ब्रेस्ड डेथ।)

हिन्दी अनुवाद :
अधिकारी आये और उसकी हथकड़ियाँ हटा दी। वे उसे जेल की कोठरी से मौत की ओर ले गये। वे पूर्णतः अविचलित थे और एक नायक की तरह चल रहे थे। अधिकारी भौंचक्के थे, जब वे फाँसी के तख्ते की ओर जाने लगे तो वे खुशी से चिल्लाये, “वन्दे मातरम्” और “भारत माता की जय”। अपनी पूरी आवाज से जोर से बोले, “ब्रिटिश साम्राज्य का नाश हो।” फिर उन्होंने शान्ति से प्रार्थना की और मृत्यु को , गले लगा लिया।

[12] As he was being executed, there was a strong guard around the prison. When he was dead, the officials brought out the dead body. Not only his parents but also hundreds of his countrymen were waiting outside in tears. The people of Gorakhpur decorated the body of the brave son of Bharat as befitted a hero and carried it in a procession. Flowers were showered on the body and the last rites were performed.

(एज ही वाज़ बीइंग एक्जीक्यूटेड, देअर वाज़ अ स्ट्रांग गार्ड अराउन्ड द प्रिज़न। व्हेन ही वाज़ डेड, द आफीशियल्स ब्राट आउट द डैड बॉडी। नाट ओनली हिज़ पेरेन्ट्स बट अल्सो हन्ड्रेड्स ऑफ हिज कन्ट्रीमैन वर वेटिंग आउट साइड इन टीअर्स। द पीपुल ऑफ गोरखपुर डेकोरेटेड द बॉडी ऑफ द ब्रेव सन ऑफ भारत एज बिफिटेड अ हीरो एण्ड केरिड इट इन अ प्रोसेशन। फ्लावर्स वर शॉवर्ड ऑन द बॉडी एण्ड द लास्ट राइट्स वर परफार्ड।)

हिन्दी अनुवाद :
जब उन्हें फाँसी पर चढ़ाया जा रहा था जेल के चारों ओर सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम थे। जब वह मृत हो गए, अधिकारीगण उनके मृत शरीर को बाहर लाये। न केवल उनके माता-पिता बल्कि सैकड़ों देशवासी जेल के बाहर अश्रुपूर्ण नेत्रों से उनका इन्तजार कर रहे थे। गोरखपुर निवासियों ने भारत के बहादुर पुत्र के शरीर को एक नायक की भाँति सजाकर जुलूस निकाला। उनके शरीर पर पुष्प वर्षा की गई और अन्तिम श्रद्धांजलि दी गई।